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आरसीएम बिजनेस के संचालक टी.सी. छाबड़ा का इंटरव्यू - Khabarkosh.com

आरसीएम में गलत कुछ है ही नहीं-छाबड़ा

आरसीएम बिजनेस के मुखिया तिलोक तंत्र छाबड़ा से आरसीएम पर लगे आरोपों, कम्पनी पर की जा रही पुलिस कार्यवाही, मंथर गति से चल रही न्यायिक प्रक्रिया और भविष्य की कार्य योजना को लेकर उठ रहे सवालों पर खबरकोश डॅाट कॅाम के सम्पादक ने बात की, गौर तलब है कि आरसीएम प्रमुख टी.सी. छाबड़ा इन दिनों जेल में है, उनसे मिले प्रश्नों के सम्पादित उत्तरांश को हम पाठकों के लिये प्रकाशित कर रहे है, उल्लेखनीय है कि करोड़ों लोगो की चहेती आरसीएम कम्पनी पर हुई पुलिसिया कार्यवाही के पश्चात कम्पनी संचालक टी.सी. छाबड़ा से मीडिया से हुई हुई यह पहली बातचीत है (सम्पादक) . . .



आप पर आरोप है कि आपने आरसीएम के नाम से चिटफण्ड कम्पनी चलाकर लोगों के साथ ठगी की है, इस बारे में आपका क्या कहना है ?

यह आरोप निराधार है। आरसीएम विशुद्ध रूप से उत्पादों की बिक्री का कारोबार है जिसमें विज्ञापन व विपणन की लागत को बचाकर इस बचत का लाभ सीधा उपभोक्ताओं को दिया जाता है। उपभोक्ताओं के हित संरक्षण में इससे बेहतर मार्केटिंग का कोई तरीका हो नहीं सकता है। कम्पनी उत्पादों के विक्रय मूल्य के अलावा कोई राशि किसी से वसूल ही नहीं करती है तो ठगी का कोई प्रश्न ही पैदा नहीं होता है। कम्पनी 700 से ज्यादा दैनिक उपयोगी उत्पादों के साथ देश भर में 4000 से ज्यादा वितरण केंद्रों के जरिये पिछले 12 सालों से लगातार उपभोक्ताओं के विश्वास में वृद्धि हासिल कर रही है। इसमें कोई भी गतिविधि ऐसी नहीं है जो चिटफण्ड के अन्तर्गत आती हो। कम्पनियां अपने उत्पाद बेचने के लिए बड़ी धनराशि विज्ञापन, मार्केटिंग आदि में खर्च कर देती है, उसे बचाकर उपभोक्ताओं में वितरित कर देने के बेहतर तरीके की चिटफण्ड में गिनती एक तरफ से चिटफण्ड एक्ट का गलत नीयत से दुरूपयोग करना हैै। चिटफण्ड एक्ट वास्तविक रूप से चिटफण्ड का कार्य कर रही कम्पनियों के कार्य को रोकने के लिए बनाया गया था। उस एक्ट को आरसीएम पर लगाना बिल्कुल कानून का मखौल बनाना है। इस तरह से तो हिन्दुस्तान के हर नागरिक को किसी न किसी कानून में आसानी से फंसाया जा सकता है। यह कानून में पारदर्शिता व स्पष्टता की कमी को उजागर करता है।


कम्पनी पर गरीबों के लिए बांटे जाने वाले एफसीआई के गेहूं की कालाबाजारी के भी आरोप है?

यह आरोप भी पूरी तरह से बनावटी है। जान बूझकर यह बनावटी आरोप लगाकर इसका दुष्प्रचार किया गया ताकि कम्पनी की ख्याति को पूरी तरह से ध्वस्त किया जा सके। वास्तव में गेहूं बाजार से खरीदा गया है जिसके सप्लायर्स के स्टेटमेन्ट व पक्के बिल मौजूद है। इस गेहूं में जो पुराना एफसीआई का बारदान उपयोग में लिया गया है उसके भी बिल सप्लायर्स के पास मौजूद है।
 कोई भी ऐसा सबूत नहीं है जो यह साबित करता हो कि यह गेहूं एफसीआई का है। केवल दबाव बनाने व बदनाम करने के उद्देश्य से यह झूठा आरोप गढ़ा गया है।


पुलिस का दावा है कि कम्पनी जाॅइनिंग के नाम पर ज्यादा पैसा बटोर रही थी तथा उत्पादों की गुणवत्ता भी ठीक नहीं थी ?

कम्पनी के जॅाइनिंग के लिए कोई अलग उत्पाद नहीं है। कम्पनी जो उत्पाद जॅाइनिंग में देती है वे ही उत्पाद उन्हीं दरों पर उपभोक्ता जॅाइनिंग के बाद भी खरीदते रहते हैं। यदि जॅाइनिंग में दिये जाने वाले उत्पाद महंगे होते तो वे ही उपभोक्ता उन्हीं उत्पादों को फिर से क्यों खरीदते ? उन्हीं उत्पादों की बार-बार खरीद ही इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि कम्पनी जॅाइनिंग के नाम पर ज्यादा पैसा नहीं बटोरती है। जॅाइनिंग के समय भी उपभोक्ता केवल उत्पादों की कीमत ही प्रदान करता है और कोई अतिरिक्त राशि उससे वसूल नहीं की जाती है।


आप पर यह भी आरोप लगाया गया कि कई लोगों को कमीशन बांटा ही नहीं गया, समूह बदल दिए गए ?

कम्पनी द्वारा प्रदान किये गये कमीशन की गणना कम्प्यूटर द्वारा की जाती है तथा हर डिस्ट्रीब्यूटर की गणना ही सूचना इंटरनेट के माध्यम से हर डिस्ट्रीब्यूटर के लिए उपलब्ध रहती है। किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर की शिकायत नहीं है कि उसका अर्जित कमीशन उसे नहीं दिया गया है।  कम्पनी के कुल वार्षिक टर्न ओवर बी.वी. का 41 प्रतिशत वितरित होता है। किसी भी समूह को कम्पनी अपनी इच्छा से कभी भी नहीं बदलती है और न ही इससे कम्पनी को कोई आर्थिक लाभ हो सकता है। कम्पनी अब तक 2000 करोड़ से ज्यादा राशि कमीशन के रूप मंे वितरित कर चुकी है व भुगतान के मामले में कम्पनी की साख बहुत ही जबरदस्त है।


आपके ग्राहक बनने के बाद दो सदस्य बनाना अनिवार्य था, फिर नीचे वाला दो बनाता, इस प्रकार आप चेन सिस्टम तो चला ही रहे थे, शायद इसलिए आरसीएम पर मनी सकुर्लशन का आरोप लगाया गया ?

कम्पनी के ग्राहक या डिस्ट्रीब्यूटर बनने के लिए किसी को कुछ राशि देनी नहीं होती है, यह महत्वपूर्ण बिन्दु ध्यान में रखना जरूरी है। दूसरी बात डिस्ट्रीब्यूटर बनने के बाद उसको दो सदस्य बनाना जरूरी ही हो ऐसा कुछ भी नहीं है। कोई ग्राहक डिस्ट्रीब्यूटर बनने के पश्चात बिना कोई सदस्य बनाये, अपनी खरीद पर भी कमीशन प्राप्त कर सकता है।
 मनी सर्कुलेशन के लिए मनी को वसूल करना या इकट्ठा करना जरूरी है जो कि आरसीएम में कही भी नहीं है। आरसीएम में केवल उत्पादों की बिक्री है व जो भी राशि वितरित की जाती है वह बचत में से की जाती है। इस प्रकार यह किसी भी तरह से मनी सर्कुलेशन के दायरे में नहीं आती है।


आपकी कम्पनी बाकी चिटफण्ड कम्पनियों से अलग कैसे है ?

बाकी कम्पनियों के मार्केटिंग प्लान का अध्ययन करना हमारा काम नहीं है। फिर भी जो कम्पनियां हाथों हाथ उत्पाद दिये बिना राशि वसूल करती है या रजिस्ट्रेशन अथवा कुछ समय बाद अधिक राशि लौटाने के आश्वासन के आधार पर राशि वसूल करती है या जिनके उत्पाद अनुपयोगी होते है। उनसे हमारी कम्पनी अलग है क्योंकि हमारे यहां वास्तविक उत्पादों के विक्रय मूल्य के अलावा कोई भी राशि वसूल नहीं की जाती है। हमारे यहां दैनिक उपयोगी उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला है व लोग उत्पादों की गुणवत्ता से संतुष्ट होकर लगातार उत्पाद खरीदते है। हमारे यहां 85 प्रतिशत टर्नओवर पुनः खरीद से होता है।


आरसीएम को स्थापित करने के पीछे आपका उद्देश्य क्या रहा ? क्या केवल पैसे कमाना या और कुछ ?

आरसीएम की स्थापना का उद्देश्य था उपभोक्ताओं को संगठित कर उनको ऐसा अवसर प्रदान करना जिसमें उनकी मिल जुलकर, एक-दूसरे को सहयोग प्रदान करने से परस्पर लाभ हासिल होता है। इससे सामाजिक एकता को बल मिलता है। इसका असर देखा भी जा सकता है। आरसीएम में सभी जाति, धर्मों, राज्यों के लाखों लोग परस्पर मदद करते हुए व जीवन मूल्यों को अपनाते हुए एक परिवार की भंाति रहते है। आज आरसीएम अपने आप में देश का बहुत बड़ा आदर्श संगठन है। आरसीएम आर्थिक पक्ष के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं जीवन मूल्य, स्वावलम्बन इत्यादी सभी पर कार्य करता है। आरसीएम के उद्देश्यों को प्राण गीत के माध्यम से समझा जा सकता है -
प्राणगीत

खुशहाल यहां पर हर जन हो।
 सुख शांति से पूरण जीवन हो।।
 सब काम करे अपना-अपना।
 खुद पूरा करें अपना सपना।।
 कोई हाथ यहां ना फैले अब।
 जन स्वावलंबी बन जावें सब।।
 चोरी फरेब का नाम ना हो।
 ना कोई किसे गुमराह करे।।
 सब सच्चे पथ के राही बने।
 आंतक न हो अब जीवन में।।
 सब पे्रम भाव रखे मन में।
 हर कोई किसी के साथ चले।।
 हर संकट में सब हाथ मिले।
 ना ऊंचे-नीच की बात करें।।
 ना जात-पांत की दूरी हो।
 ना सीमा की मजबूरी हो।।
 हमें कोई जुदा ना कर पावे।
 सब भारतवासी कहलावें।।
 मजबूर नहीं हम महान बने।
 भारत मां की हम शान बने।।
 पूरण होगी सबकी आशा।
 यह आरसीएम की अभिलाषा।।


सुना है कि आपके कई प्रोडक्टस् को अवार्ड भी मिल चुके है ?

आरसीएम में एक महत्वपूर्ण व स्वास्थ्य रक्षण उत्पाद है – ‘ आरसीएम हेल्थ गार्ड अॅायल’। यह एक उत्तम खाद्य तेल है। आरसीएम में बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री होती है। इसने लाखों लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाया है। लगातार इसके उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य लाभ संबधित अनुभव आते रहते है व इनका प्रकाशन भी किया जाता है। इस तेल की निर्माता कम्पनी इस उत्पाद की गुणवत्ता की वजह से भूतपूर्व राष्ट्रपति माननीय अब्दुल कलाम साहब, राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल तथा प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह द्वारा अवार्ड मिल चुके है। इस उत्पाद का मार्केटिंग का कार्य आरसीएम ब्रांड में आरसीएम द्वारा ही किया जाता है।


आप स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि क्षेत्र में कुछ नवाचार करने की कोशिश में थे, वो नवोन्मेष क्या था ?

आरसीएम एक ऐसा अभियान है जो जीवन मूल्यों का पक्षधर है व एक अच्छे समाज की स्थापना करना चाहता है। जैसे-जैसे इसका कार्य बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे इसके उद्देश्यों में समाज के महत्वपूर्ण कार्यों को हाथ में लिया जा रहा है। स्वास्थ्यप्रद उत्पादों पर ही रही कार्य नहीं किया जा रहा है बल्कि स्वास्थ्य के लिए सही शिक्षा पर भी काम शुरू किया गया है। उत्पादों में खाने-पीने के शुद्ध उत्पाद, स्वास्थ्य रक्षक हेल्थ गार्ड अॅायल, न्यूट्रीचार्ज के रूप से आवश्यक तत्वों की पूर्ति व सही स्वास्थ्य का समाधान आदि पर कार्य शुरू हो चुका है। आरसीएम की शिक्षा जिसके लिए लगातार पुस्तकों, गीतों, कविताओं, दैनिक कार्यक्रमों आदि के द्वारा काम किया गया और आरसीएम के डिस्ट्रीब्यूटर्स का सकारात्मक जीवन जीने का तरीका इसका साक्षात उदाहरण है। कृषि क्षेत्र में भी अभूतपूर्व कार्य किया गया और इज्राइल आधारित 4 स्तरीय उपचार प्रणाली को हरित संजीवनी के रूप में प्रदान किया, जिसका लाभ हजारों किसान अपनी फसल व भूमि की गुणवत्ता व फसल की मात्रा में बढ़ोतरी के रूप में ले चुके है। इसके अलावा आरसीएम उद्भव के अन्तर्गत एक अभियान और शुरू किया गया, जिसके तहत बड़े स्तर पर पांच उद्देश्यों पर काम किया जा रहा है -
 महिला उत्थान
 मूल्य आधारित शिक्षा
 नशा मुक्ति
 आतिशबाजी का निषेध
 जल व बिजली बचत

इन सभी उद्देश्यों पर अब आगे और भी बड़े रूप में कार्य किया जायेगा।


क्या आपको ऐसी उम्मीद थी कि आप पर ऐसी बर्बर पुलिसिया कार्यवाही की जा सकती है ?

ऐसा सोचना नामुमकिन था। आज तक जब भी कहीं की भी पुलिस को आरसीएम के बारे में कोई आशंका हुई तो उन्होंने हमारे लोगों को बुलाया और इसके बारे में समझते ही उन्होंने इसे सही माना। केरल पुलिस ने एमएलएम कम्पनियों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की पर आरसीएम को उन्होंने सही माना। आन्ध्रप्रदेश की कोर्ट ने भी आरसीएम को सही माना। आरसीएम में गलत कुछ है ही नहीं। पूरा टेक्स समय पर चुकाया जाता है। 12 सालों से खुले रूप से पूरे देश में इसका कार्य चल रहा है। जब भी कानूनी सलाह ली गई इसे पूर्णतः सही बताया गया। ऐसे में कोई भी इन्सान क्यों सोचेगा कि उस पर ऐसी गाज गिर सकती है। यदि एक प्रतिशत भी इसकी आशंका होती तो मैं इस कारोबार को इस तरह पूरे देश में विस्तार रूप में कभी नहीं फैलाता। कार्यवाही करने वालों ने जरा भी नहीं सोचा कि कितनी मुद्दत तक कितनी मेहनत करने के बाद इस तरह का तंत्र खड़ा होता है। लाखों लोगों के भविष्य का भी उन्होंने ख्याल नहीं किया। सचमुच यह एक बहुत ही आश्चर्यजनक कार्यवाही है। जांच के नाम पर बिना कोई अपराध साबित हुए इस तरह 12 सालों में बनाये गए तंत्र को ध्वस्त कर देना, कोई न्यायपूर्ण कार्यवाही नजर नहीं आती है।


क्या यह कार्यवाही राजनीति से प्रेरित रही ? आप ही को क्यों निशाना बनाया गया ? क्या आपकी किसी राजनेता या अधिकारी से कोई रजिंश थी या आपकी सज्जनता, आपकी विद्वता, आपकी विशालता या आपकी उदारता आपके लिए घातक हो गई ? आपको क्या लगता है ?

मेरा अपना न तो कोई राजनैतिक अस्तित्व है न ही मेरा किसी से कोई विद्वेष है इसलिए यह संभावना लगती नहीं है। फिर भी किसी को मुझसे कोई नाराजगी है तो मैं उससे क्षमा मांगता हूं। पर मेरा अनुरोध यह है कि कम से कम मुझे बता दे वो, कि मुझसे क्या नाराजगी है ताकि मैं उस बात का ख्याल आगे रख सकूं। वैसे एक बात जरूर समझ के परे है कि जब हमारे लोग मुख्यमंत्री जी, गृह सचिव जी, मुख्य सचिव जी व अन्य अधिकारियों से मिलते है तो सब यह कहते है कि आपका काम सही है और शीघ्र ही आपका समाधान निकालते हैं। केंद्र और राज्यों के अनेक मंत्री, सांसद और विधायक आदि भी आरसीएम की व्यवस्था को समझने के पश्चात उसको सही बताते हैं और अपनी ओर से इसे पुनः चालू करने की भी सिफारिश राजस्थान सरकार के पास भेजते है। अन्य गणमान्य से लेकर आम आदमी तक आरसीएम पर हुई कार्यवाही को गलत मानता है।  आरसीएम के कई डिस्ट्रीब्यूटर पहले 13 दिन तक दिल्ली में अनशन कर चुके है। फिर मुख्यमंत्री जी ने शीघ्र आरसीएम को चालू करने की कार्यवाही का आश्वासन देकर उनको वहां से उठाया। लेकिन काफी दिनों तक भी कुछ नहीं हुआ तो फिर डिस्ट्रीब्यूटरर्स जयपुर में धरना लगा कर बैठे हैं। महिलाएं और बच्चे भी कई दिनों से वहां बैठकर अपनी व्यथा बता रहे है। बार-बार आश्वासन पर आश्वासन मिल रहे है पर कुछ हो नहीं रहा है। आखिर इसके पीछे क्या वजह है ? ऐसी कौनसी मजबूरी है।


आपने पुस्तकें भी लिखी, गीत रचे, खूब भाषण दिए, आप एक संवेदनशील रचनात्मक व्यक्ति है, आपको ये दिन देखने पड़े, इसका आप के मन और विचारों तथा भविष्य की कार्य योजना पर क्या प्रभाव पड़ा ?

जिस तरीके से कार्यवाही हुई और अचानक बिना विवेक का इस्तेमाल किये इतनी बड़ी व्यवस्था जिसका इस रूप में बनना आसान कार्य नहीं है को ठप्प कर दिया गया और कम्पनी के साथ-साथ लाखों लोगो के लिए अपूरणीय क्षति का तथा भविष्य के लिए अनेक परेशानियों का पहाड़ खड़ा कर दिया। कानून व्यवस्था लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए होती है लेकिन यहां तो पूरा बर्बादी का मंजर खड़ा कर दिया गया। निश्चित रूप से यह घटना किसी को भी विचलित कर सकती है। लेकिन जिन्दगी मे कभी-कभी ऐसा होता है कि दूसरों की गलतियों की सजा आपको भुगतनी पड़ती है। जो भी हुआ मेरे अफसोस का विषय नहीं है। अफसोस उन्हें करना चाहिए जो इस कार्यवाही के प्रति जिम्मेदार हैं। मेरे लिए वक्त ने ये दिन दिए हैं तो ये ही सही। ये अन्र्तआत्मा को कमजोर नहीं कर सकते। मैंने जीवन में दूसरों के लिए अच्छा सोचने का यथा संभव प्रयास किया है और कहीं गलती हुई है तो उसे दूर करने का प्रयास करूंगा। इस घटना से इस देश की चरमरायी व्यवस्थाओं का रूप जरूर सामने आया है और महसूस होता है कि इस देश को इन्सान के लिए जीने लायक बनाने के लिए किसी बड़ी क्रांति की जरूरत है।


आरसीएम का भविष्य क्या है? क्या आप कभी जेल से निकल पाएंगे ? क्या ये बिजनेस वापस चलेगा ? हजारों पिकअप सेंटरों, बाजारों व आपके लिए उत्पादन करने वाली इकाईयों को हुये नुकसान की भरपाई आप कैसे करेंगे ?

सोना जितना आग में तपता है उतना ही खरा बनता है। आरसीएम भी अब नये रूप मंे नयी ऊंचाइयों के साथ दुनिया के समक्ष होगा। जब शून्य से यहां तक पहुंचा जा सकता है तो क्या अब नया इतिहास नहीं बनाया जा सकता है ? न्याय व्यवस्था पर हमें भरोसा रखना होगा अगर न्याय अंधा हो गया तो इस देश का आम आदमी जायेगा कहां ? फिर तो ये दिन गुलामी से भी ज्यादा बुरे है। यह घटना लोगों के जमीर को जगाने के लिए है। सत्य की जीत एक दिन होकर रहेगी। 6 माह से ज्यादा समय से आरसीएम के लाखों डिस्ट्रीब्यूटर्स लगातार धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन आदि के द्वारा सरकार के सामने यह मांग रख रहे है कि आरसीएम ही हमारे जीवन का सहारा है, हम आरसीएम से पूर्ण रूप से संतुष्ट हैं। यहीं आरसीएम की सच्चाई का सबसे बड़ा प्रमाण है। इतने बड़े सत्य के सामने आखिर कब तक प्रशासन आंखे मूंदे देखता रहेगा।


कोई खास बात जो आप कहना चाहे ?

हर इंसान को परमात्मा ने कुछ खास देकर इस धरती पर भेजा है। हमारी यहीं जिम्मेदारी बनती है कि हम परमात्मा की उस देन को पहचाने और इस जीवन में उस देन का सदुपयोग करें। मैंने परमात्मा की इस देन को पहचानने की कोशिश की तो मैंने पाया कि मेरे भीतर संसाधनों, समय, व्यवस्थाओं, सम्बधों, क्षमताओं आदि को बनाने की सोच परमात्मा ने दी है और इसी सोच को मैंने आरसीएम अभियान के माध्यम से समाज हित में काम में लेने का बीड़ा उठाया। लोग तुरन्त यह कह देते है कि आरसीएम से आपने पैसा कमाया। अच्छा होता कोई इस अभियान का विश्लेषण करता तो अवश्य वह इसका निष्कर्ष निकाल पाता। इस तरह दैनिक उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला को प्रबन्धित करना, बाजार दरों से कम दरों पर गुणवत्ता के साथ पूरे देश में उपलब्ध करवाना, सरकार को पूरा टैक्स चुकाना, उसके बाद भी उसमें से अच्छे खासे कमीशन का वितरण उपभोक्ताओं को करना और साथ में इतने लोगों को संगठित बनाये रखना इस सब के बाद कोई कम्पनी चलाना भी किसी के लिए मुश्किल हो सकता है लेकिन इतनी कठिन व्यवस्था के साथ भी आरसीएम खड़ा ही नहीं है बल्कि आर्थिक रूप से पूर्ण सक्षम है तो यह खोज का विषय है न कि लांछन लगाने का या कीचड़ उछालने का। दुनिया का दस्तूर यह है कि जो खुद कुछ नहीं कर सकते हैं वे करने वालों के उपर कीचड़ उछाल कर अपने मन की भड़ास निकाल लेते है। यह बात मैं अहंकार से नहीं बल्कि दुनिया के सामने एक सच्चाई लाने के उद्देश्य से कह रहा हूं। मेरे लिए अभी आत्म मंथन का समय है। मैं अपनी क्षमताओं का उपयोग अच्छे कार्य के लिए करना चाहता हूं। अपनी कमियों पर दृष्टिपात कर उन्हें दूर करना चाहता हूं। किसी ऐसे रास्ते की तलाश कर रहा हूं कि दुनिया को प्रेम की शक्ति का चमत्कार दिखा सकूं।


उन करोड़ो उपभोक्ताओं, लाखो लीडरों, हजारों कर्मचारियों को आपका क्या संदेश है जो आरसीएम के लिए लड़ रहे है ?

कुछ बड़ा करने के लिए अपने आप को तैयार कर लो। ऐसा मौका फिर ना मिलेगा। ऐसी तपिश फिर न मिलेगी। इस मौके से चूक न जाना। कुछ कमजोरी रूपी अशुद्धि है तो उसे जलने दो। अपने आप को इतना तपने दो कि आपके भीतर सिर्फ जुनून, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और ताकत के अलावा कुछ बचें ही नहीं। परमात्मा को धन्यवाद दो कि तूने हमें इतना खरा बनने का मौका दिया।