जयपुर। भारत की विख्यात प्रत्यक्ष विक्रय प्रणाली पर आधारित आरसीएम कंपनी को पुलिसिया डण्डे के बल पर जबरदस्ती बंद करने से राजस्थान सरकार की पूरे देश में थू-थू हो रही है। गत पाँच माह से आन्दोलन कर रहे लाखों उपभोक्ताओं के दर्द को मुख्यमंत्री गहलौत द्वारा महसूस न किया जाना उनकी संपूर्ण कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। संपूर्ण देश में 1 करोड़ 31 लाख संतुष्ट उपभोक्ताओं को बेरोजगार कर दिये जाने के कारण उपभोक्ता अब राजस्थान सरकार के खिलाफ याचना छोड़ राष्ट्रीय संग्राम करने की तैयारी कर रहे हैं।
उधर उद्योग मैदान में पूरे देश से आये हजारों उपभोक्ताओं का चिलचिलाती धूप में ऐतिहासिक धरना 19वें दिन भी जारी रहा। उक्त जानकारी आरसीएम उपभोक्ता एवं वितरक कल्याण समिति के मीडिया प्रभारी राम शंकर सिंह एवं अवधेश सिंह ने दी।
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के एक प्रदेश में गाँधीवादी तरीके से अपनी हक एवं हकूक की लड़ाई लड़ रहे लोगों के धरना स्थल पर मुख्यमंत्री के किसी प्रतिनिधि का अभी तक न आना, यह साबित करता है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री न केवल दम्भी है बल्कि तानाशाही प्रवृत्ति के पाषक भी हैं। सरकार की इसी तानाशाही प्रवृत्ति के खिलाफ धरनारत उपभोक्ताओं के साथ-साथ पूरे देश के उपभोक्ताओं के अंदर भयंकर गुस्सा भड़क उठा है।
श्री गहलौत के समक्ष गत पाँच माह से करोड़ों उपभोक्ता उनसे राज-पाट मांग रहे है क्या? वे तो मात्र सरकार से इतनी मांग कर रहे है कि गत् 11 वर्षो से न किसी उपभोक्ता एवं न किसी सरकार को आरसीएम से तकलीफ थी, परंतु 9 दिसंबर 2011 को भीलभाड़ा पुलिस ने किसी साजिशवश जबरिया आरसीएम की वितरण व्यवस्था को बंद किया है, उसे आप चालू कर दें। आरसीएम के ऊपर 9 दिसंबर 2011 के पूर्व कोई मुकदमा नहीं था। परंतु 9 तारीख के बाद कई फर्जी मुकदमें लाद दिये गये। यह भारतीय कानून की आँखों में धूल झोंक कर पुलिसिया नंगा नाच का सर्वाधिक घिनौना उदाहरण है।
आरसीएम की वितरण व्यवस्था को चालू करने में सरकार की मंशा साफ नहीं है। इसी कारण गत पाँच माह से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलनरत उपभोक्ताओं ने महान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की क्रांतिकारी कविता याचना नहीं अब रण होगा, संग्राम महाभीषण होगा को अपना मंत्र मानकर, गहलौत सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज करने का ऐलान किया है। राष्ट्रकवि दिनकर की इस कविता ने अंग्रेजों के खिलाफ भारत को राजनैतिक आजादी दिलाने में क्रांतिकारियों के अंदर संजीवनी का काम किया था।
बाद में इसी कविता की लाईन ने जे.पी. क्रांति के दौरान (1977) आपातकाल में इंदिरा गाँधी को सत्ता से बेदखल करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। आज वक्त है आर्थिक आजादी की लाड़ाई का। आरसीएम की बेहतरीन ऑनलाईन सिस्टम के द्वारा देश में लाखों गरीब लोगों का न केवल जीवन स्तर ऊँचा हुआ, बल्कि सरकार को भी सालाना 125 करोड़ राजस्व देकर राष्ट्र निर्माण में भी अमूल योगदान किया गया है।
उधर उद्योग मैदान में पूरे देश से आये हजारों उपभोक्ताओं का चिलचिलाती धूप में ऐतिहासिक धरना 19वें दिन भी जारी रहा। उक्त जानकारी आरसीएम उपभोक्ता एवं वितरक कल्याण समिति के मीडिया प्रभारी राम शंकर सिंह एवं अवधेश सिंह ने दी।
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के एक प्रदेश में गाँधीवादी तरीके से अपनी हक एवं हकूक की लड़ाई लड़ रहे लोगों के धरना स्थल पर मुख्यमंत्री के किसी प्रतिनिधि का अभी तक न आना, यह साबित करता है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री न केवल दम्भी है बल्कि तानाशाही प्रवृत्ति के पाषक भी हैं। सरकार की इसी तानाशाही प्रवृत्ति के खिलाफ धरनारत उपभोक्ताओं के साथ-साथ पूरे देश के उपभोक्ताओं के अंदर भयंकर गुस्सा भड़क उठा है।
श्री गहलौत के समक्ष गत पाँच माह से करोड़ों उपभोक्ता उनसे राज-पाट मांग रहे है क्या? वे तो मात्र सरकार से इतनी मांग कर रहे है कि गत् 11 वर्षो से न किसी उपभोक्ता एवं न किसी सरकार को आरसीएम से तकलीफ थी, परंतु 9 दिसंबर 2011 को भीलभाड़ा पुलिस ने किसी साजिशवश जबरिया आरसीएम की वितरण व्यवस्था को बंद किया है, उसे आप चालू कर दें। आरसीएम के ऊपर 9 दिसंबर 2011 के पूर्व कोई मुकदमा नहीं था। परंतु 9 तारीख के बाद कई फर्जी मुकदमें लाद दिये गये। यह भारतीय कानून की आँखों में धूल झोंक कर पुलिसिया नंगा नाच का सर्वाधिक घिनौना उदाहरण है।
आरसीएम की वितरण व्यवस्था को चालू करने में सरकार की मंशा साफ नहीं है। इसी कारण गत पाँच माह से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलनरत उपभोक्ताओं ने महान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की क्रांतिकारी कविता याचना नहीं अब रण होगा, संग्राम महाभीषण होगा को अपना मंत्र मानकर, गहलौत सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज करने का ऐलान किया है। राष्ट्रकवि दिनकर की इस कविता ने अंग्रेजों के खिलाफ भारत को राजनैतिक आजादी दिलाने में क्रांतिकारियों के अंदर संजीवनी का काम किया था।
बाद में इसी कविता की लाईन ने जे.पी. क्रांति के दौरान (1977) आपातकाल में इंदिरा गाँधी को सत्ता से बेदखल करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। आज वक्त है आर्थिक आजादी की लाड़ाई का। आरसीएम की बेहतरीन ऑनलाईन सिस्टम के द्वारा देश में लाखों गरीब लोगों का न केवल जीवन स्तर ऊँचा हुआ, बल्कि सरकार को भी सालाना 125 करोड़ राजस्व देकर राष्ट्र निर्माण में भी अमूल योगदान किया गया है।